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उत्सर्ग – अपवाद...
Download PDF जिनशासन की अप्रतिम विशेषताओं में से एक है 🡺 जिनशासन में मार्ग के दो प्रकार बताए गए हैं – उत्सर्ग और अपवाद। कोई विशेष कारण न हो, तब जिसका आचरण करना है, उसे उत्सर्ग कहते हैं। विशेष कारण आने पर जिसका आचरण करना है, उसे अपवाद कहते हैं। उदाहरणों से यह विषय स्पष्ट होगा। साधु-साध्वी भगवंतों के आचरण में उत्सर्ग-अपवाद को समझते हैं 🡺 1. रोज एकासणा करना – एक ही बार गोचरी वापरना, वह उत्सर्ग है। बीमारी हो, वृद्धावस्था हो, विहार-प्रवचन-पठन आदि का कठोर परिश्रम हो, तपस


ઉત્સર્ગ-અપવાદ...
Download PDF જિનશાસનની અપ્રતિમ વિશેષતાઓમાં એક છે 🡺 જિનશાસનમાં માર્ગના બે પ્રકાર બતાવ્યા છે – ઉત્સર્ગ અને અપવાદ. કોઇ વિશિષ્ટ કારણ ન હોય, ત્યારે આચરવાના માર્ગને ઉત્સર્ગ કહેવાય છે. વિશિષ્ટ કારણ આવી પડે, ત્યારે આચરવાના માર્ગને અપવાદ કહેવાય છે. દૃષ્ટાંતોથી આ પદાર્થ સ્પષ્ટ થશે. સાધુ-સાધ્વી ભગવંતોના આચારોમાં ઉત્સર્ગ-અપવાદ સમજીએ 🡺 1. રોજ એકાસણું કરવું – એક જ ટંક ગોચરી વાપરવી - તે ઉત્સર્ગ છે. બિમારી હોય, વૃદ્ધાવસ્થા હોય, વિહાર-પ્રવચન- વાચના વગેરેનો સખત પરિશ્રમ હોય, તપનું પાર


इच्छा पूरी करवा पुण्यजोईए, खतम करवा नहीं....
इच्छा पूरी करवा घणो पुरुषार्थ करवो पडे छे. पुरुषार्थ कर्या पछी पण सफळतानी खातरी नथी होती, पुण्यनो साथ मळे, तो सफळता मळे छे. इच्छा खतम करवा माटे पुण्यनी जरूर तो पडती ज नथी. अने पुरुषार्थ बहु थोडो करवानो होय छे – जातने समजाववानो. एक चा बनाववा केटली सामग्री जोइए ? दूध, पाणी, चा, खांड, मसालो, तपेली, चूलो, गेस, लाइटर, साणसी, गळणी, कप-रकाबी... सत्तर वस्तु जोइए. अमे इर्लामां एक वार पू. पं. श्री चंद्रशेखरवि. म. नी साथे ३० जेटला महात्माओ हता. सवारना बे महात्मा नवकारशी वहोरवा गयेला. पो
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