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साधर्मिक भक्ति अने उपधानादि अनुष्ठानो...
Download આ લેખ આપ ગુજરાતીમાં પણ વાંચી શકો છો भ्रमणा : केटलाय साधर्मिकोने जीवन-निर्वाहना सांसा छे, त्यारे उपधानादि अनुष्ठानोमां लाखो-करोडो रूपियानो धूमाडो करवो योग्य नथी. वास्तविकता : उपलक दृष्टिए खूब सारी जणाती आ वातनी अंदर ऊतरीए, त्यारे आवो विचार करनारानुं जिनशासननुं वरवुं अज्ञान छतुं थाय छे. दुःखी जीवो प्रत्येनी करूणा शास्त्रकार बे प्रकारनी बतावे छे 1. द्रव्य-करूणा --> दुन्यवी दुःख दूर करवा, दुन्यवी सुखनी सामग्री आपवी... जेम के अनाज, कपडां, घर वगेरे आपवा.. 2. भाव-करूणा -->
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