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धर्ममां धनवानोनुं महत्त्व...
भ्रमणा : आपणा धर्ममां धनवानोने सर्वत्र आगळ कराय छे ते योग्य नथी. धर्ममां धननुं महत्त्व न होवुं जोइए. वास्तविकता : लीला चश्मा पहेर्या होय, तेने बधुं लीलुं देखाय. सम्यग् दर्शन माटे दृष्टि सम्यक् जोइए. आपणा धर्ममां धनवानोनुं (तमने देखातुं) जेटलुं महत्त्व छे, तेना करतां आराधकोनुं महत्त्व घणुं घणुं वधारे छे, कराय छे. सर्वत्र विरतिधर महात्माओ, जे अकिंचन छे, तेमनुं स्थान सौथी ऊंचुं होय छे... तेमनुं नाम सर्वत्र पहेलुं लखाय छे.. पाछळथी आवेला महात्माओने पण सर्वत्र आगळ आववा मळे छे... बध
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