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शास्त्रवचनोमां विरोध...
Download PDF शास्त्रवचनोना तात्पर्य सुधी पहोंचवा माटे, पदार्थ-वाक्यार्थादि क्रमे ऊहापोह जरूरी छे. अन्य शास्त्रवचनो साथे विरोधनुं उद्भावन – ए ज वाक्यार्थ छे. जे व्यक्ति, तेवो ऊहापोह करीने विरोधनुं उद्भावन ज न करे, एक शास्त्रवचनने सर्वथा-सर्वदा-सर्वत्र प्रमाण मानी ले, ते ‘पदार्थ’मां ज अटकी जाय छे, तेने श्रुतज्ञान ज थाय छे, चिंता-भावना ज्ञान थतां नथी – एम उपदेश-रहस्यादि ग्रंथोमां कह्युं छे. विरोधनुं उद्भावन कर्या पछी, महावाक्यार्थ सुधी शी रीते पहोंचाय ? ते विशे यत्किंचित् विचार
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