इच्छा पूरी करवा पुण्यजोईए, खतम करवा नहीं....

इच्छा पूरी करवा घणो पुरुषार्थ करवो पडे छे. पुरुषार्थ कर्या पछी पण सफळतानी खातरी नथी होती, पुण्यनो साथ मळे, तो सफळता मळे छे.
इच्छा खतम करवा माटे पुण्यनी जरूर तो पडती ज नथी. अने पुरुषार्थ बहु थोडो करवानो होय छे – जातने समजाववानो.
एक चा बनाववा केटली सामग्री जोइए ?
दूध, पाणी, चा, खांड, मसालो, तपेली, चूलो, गेस, लाइटर, साणसी, गळणी, कप-रकाबी... सत्तर वस्तु जोइए.
अमे इर्लामां एक वार पू. पं. श्री चंद्रशेखरवि. म. नी साथे ३० जेटला महात्माओ हता. सवारना बे महात्मा नवकारशी वहोरवा गयेला. पोणो कलाके पाछा आव्या. पातरां भरेलां, पण तरपणीओ खाली – दूध के चा कंइ नहीं. आवीने कहे – ‘आजे पाइपलाइनमां गेस नथी’ ! केटलीय वस्तु भेगी थाय, त्यारे चा बने.
सभा : ए तो एक वार भेगी करी दइए, पछी चाल्या करे.
ते पुण्य होय, तो चाले. बाकी खांडनो डबो खोलो ने खबर पडे के कीडीओ थइ गइ छे. लाइटर पण हवाइ जाय, अने एके दीवासळी न सळगे. साणसीनी पिन ढीली पडी गइ होय अने बे छेडा भेगा न थता होय, तो शुं थाय ?
टाइटेनिक डूबी जवानुं कारण, पतराने जोडती रिवेटो खवाइ गयेली – ते हतुं, तेवुं संशोधको कहे छे.
केटलां पासां सवळां पडे, तो एक इच्छा पूरी थाय ?
भगवान कहे छे – आ बधी भांजगड छोड... इच्छा ज छोडी दे – ‘नथी जोइतुं’... एक मिनिटमां सुखी थइ जइश.
Extract from Book Sukh Kyan written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

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