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जिनवाणी-श्रवण-विवेक...
Download આ લેખ આપ ગુજરાતીમાં પણ વાંચી શકો છો आप आज जिनवाणी सुनने आए हैं... आपको लाख-लाख धन्यवाद! आप जिनवाणी-श्रवण इस प्रकार से करें कि आपको जिनवाणी सुनने का सुयोग सदा मिलता रहे, भवान्तर में भी मिले... और आपको सुनना प्रिय भी लगे... है न? इसके लिए तीन बातों का ध्यान रखना है 🡺 1. दूसरों के जिनवाणी-श्रवण में अंतराय उत्पन्न न करें। न बातें करें... न कुर्सी खिसकाने की आवाज़ करें... न मोबाइल की घंटी बजने दें... न वाहन का हॉर्न बजाएँ... हमारी वजह से हुई ध्वनि से,
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