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त्याग अने भावना....
આ લેખ આપ ગુજરાતીમાં પણ વાંચી શકો છો एक वस्तु मेळववा बीजी वस्तु त्यागे, तेमां त्यागवानी भावना प्रायः न होय- त्यागवा जेवुं लागतुं न होय. सभा : मोक्ष मेळववा त्यागे तेने पण प्रलोभन ज कहेवाय ने ? मोक्ष एटले शुं ? ते समज्या न होय, तेने ज आवो प्रश्न थाय. आपणे पूर्वे जणावेलुं के साधना वीतराग बनवा माटे छे, मोक्ष तो बोनसमां मळे छे. वीतराग बनवानी इच्छानो अर्थ ज छे राग घटाडवानी भावना. ते ज त्यागवानी भावना छे. तेमां प्रलोभन शुं छे ? कंइ नहीं. फरी वात करुं – त्याग अवश्य करवानो छे, पण साथे
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