भगवान के पास गुरु की मूर्ति रखी जा सकती है?...

प्रश्न : भगवान के पास गुरु की मूर्ति रखी जा सकती है?
उत्तर :
किसी भी जिनालय में भगवान के एकदम पास गुरुमूर्ति देखने को नहीं मिलती। यदि हो, तो प्रायः बाजू में, अलग गवाक्ष (ताक) में होती है। प्रभु और गुरु — दोनों पूज्य हैं — इसमें कोई प्रश्न नहीं है। नवपद में परमात्मा के साथ गुरु भगवंत होते ही हैं। नवकार मंत्र में दोनों को नमस्कार है।
फिर भी, उसमें क्रम तो है — पहले परमात्मा, फिर गुरु भगवंत। इसलिए दोनों को समान स्थान नहीं दिया जाता।
परमात्मा के एकदम पास (नीचे आसन पर भी) गुरुमूर्ति नहीं रखी जाती, अलग स्थान पर ही पधराई जाती है — यही विवेक है।
अलबत्त, गणधर भगवंतों (या केवलज्ञान प्राप्त अन्य गुरु भगवंतों) की सिद्ध-स्वरूप मूर्ति हो, तो परमात्मा के पास पधराई जा सकती है।
घर के जिनालय में जगह कम होने से यदि किसी ने परमात्मा के पास गुरुमूर्ति (या फोटो) रखी हो, तो वह अलग विषय है। प्रायः वह दर्शनीय ही होती है।
कभी-कभी प्रक्षाल-पूजा आदि के लिए धातु के परमात्मा के पास धातु की गुरुमूर्ति थोड़े समय के लिए रखी जाए, तो वह अस्थायी है।
एक महत्त्वपूर्ण बात — इन प्रश्नोत्तरों का उपयोग अपनी सम्यक् प्रवृत्ति के लिए या अज्ञानी जीवों के अज्ञान का (करुणापूर्वक) निवारण करने के लिए करेंगे — उनका आत्महित होगा। दूसरों की निंदा करने के लिए — उन्हें तोड़ने के लिए उपयोग करने वाला इसे पढ़ने का अधिकारी ही नहीं है।
Article written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

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