तप किया हो, उसका बहुमान कोई करे, तो क्या करना चाहिए ?...
- 8 hours ago
- 1 min read

प्रश्न : तप किया हो, उसका बहुमान कोई करे, तो क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
उपबृंहणा-बहुमान (प्रोत्साहन-सम्मान) यह भी सम्यग्दर्शन का आचार है।
हमें कोई वंदन करे - ऐसी अपेक्षा हम नहीं रखतें; परंतु कोई वंदन करे, तो मना भी नहीं करते । हाँ, उसमें अहंकार नहीं करतें । 'यह बहुमान मेरा नहीं, साधु के वेश का है' - ऐसी भावना से अपने आपको भावित करते हें।
उसी प्रकार, कोई बहुमान करे - ऐसी अपेक्षा तपस्वी को नहीं रखनी चाहिए । परंतु कोई करे तो सर्वथा निषेध करना भी उचित नहीं है । 'यह बहुमान तप का है, मेरा नहीं' - ऐसी भावना से अपने आपको भावित करना चाहिए।
बहुमान के भाव से बहुमान करता हो, उसकी यह बात है।
जो संसार का व्यवहार समझकर बहुमान करता है और सामने से व्यवहार की अपेक्षा रखता है - वह वास्तव में बहुमान है ही नहीं। उसकी बात अलग हो सकती है।
Article written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

Comments