वीगनवाद

भ्रमणा : दूध पीना या दूध से बनी वस्तुओं का सेवन करना – यह भी मांसाहार है।
वास्तविकता :
शिशु अपनी माता का दूध पीता है। क्या इसे मांसाहार कहा जाएगा? कदापि नहीं।
रक्त पीना – वह मांसाहार है। माता का दूध पीना – वह मांसाहार नहीं है।
क्यों? क्योंकि जब शिशु माँ का दूध पीता है, तो उससे माँ को वेदना नहीं होती, बल्कि आनंद होता है।
इतना ही नहीं, यदि किसी कारणवश शिशु दूध न पी पाए, तो माँ को दूध निकालना पड़ता है।
इसी प्रकार, गाय-भैंस आदि दुधारू पशुओं का दूध पीने में कोई मांसाहार नहीं है, क्योंकि उनके शरीर से दूध निकालने में उन्हें कोई पीड़ा नहीं होती। वे अपनी ठीक से देखभाल करने वाले को ही दूध निकालने देती हैं, किसी और को नहीं। यही दर्शाता है कि किसी योग्य व्यक्ति द्वारा दूध निकालना उन्हें अवांछित नहीं लगता। इतना ही नहीं, वह दूध निकालना आवश्यक भी है।
मजदूरी करने वाले श्रमिक को कष्ट में देखकर यदि किसी को दया आ जाए, तो क्या करना चाहिए? क्या ऐसी मजदूरी से बनी वस्तु का उपयोग ही बंध कर देना चाहिए ?
इससे तो उसकी रोजी-रोटी ही बंद हो जाएगी... भूखों मरने की नौबत आ जाएगी...
यह दया नहीं, मूर्खता है।
दया तो उसे कहते हैं कि उसकी रोजी-रोटी चलती रहे और उसका श्रम भी सीमित हो – ऐसे प्रयास किए जाएँ। (जैसे कि वहाँ बनने वाली वस्तु की अधिक कीमत देने के लिए तैयार होना।)
इसी तरह, यदि कहीं पशुओं पर कोई क्रूरता कर रहा हो, तो दूध पीना या दूध से बनी वस्तुएँ खाना बंद कर देना – यह तो उन पशुओं को कत्लखाने की ओर धकेलने वाला कार्य है। यह दया नहीं, मूर्खता है।
सच्ची दया उसे कहते हैं कि ऐसी क्रूरता न हो – इसके लिए प्रयास किए जाएँ। (जैसे कि दूध की अधिक कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना... आदि।)
दूध के त्याग का यह वीगनवाद, दुधारू पशुओं के सामूहिक संहार का एक खतरनाक षड्यंत्र ही प्रतीत होता है।
सच्ची दया, अधिक कीमत देकर दूध खरीदने में है, दूध बंद करने में नहीं।
Article written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

Great Article 🕊️🙏 This post has truly been an eye-opener! 🙏 It made me think deeply about the difference between compassion and blindly following an ideology. Animal welfare should be our priority, but we must also examine the long-term consequences of our choices. Instead of assuming that completely abandoning dairy is the only way to protect animals, we should focus on ethical dairy farming, proper animal care, and preventing cruelty.
We should question every ideology critically rather than accept every claim at face value. True compassion should protect lives, not put them at risk. 🕊️🙏