देवद्रव्यने, जग्यामां के सोना-चांदीमां इन्वेस्ट करी शकाय ?
- Aug 6
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प्रश्न : देवद्रव्यने, जग्यामां के सोना-चांदीमां इन्वेस्ट करी शकाय ?
उत्तर :
सौ प्रथम वात तो ए छे के दाता, रकमनो सदुपयोग करवा माटे दान आपे छे, मूकी राखवा माटे नहीं. चडावाओ पण, धर्मस्थानोना निर्वाह सरळताथी थाय, ते माटे शरू करवामां आव्या छे; द्रव्यने भेगुं करवा माटे नहीं.एटले देवद्रव्य (के कोइपण धर्मद्रव्य) नो योग्य सदुपयोग करवो जोइए, भेगुं करवुं ज न जोइए के जेनुं इन्वेस्टमेन्ट करवुं पडे.
छतां केटलांक कारणोसर इन्वेस्टमेन्ट करवुं पण पडे छे. जेम के
निधि (कोर्पस फंड), जेना व्याजमांथी निर्वाह करवानी गणतरीथी ज जे ऊभुं कराय छे. एमां प्रायः साधारण (के वैयावच्च) द्रव्य होय छे.
लांबा गाळे आवी पडतां मोटा खर्चने पहोंची वळवा दर वर्षे थोडां थोडां द्रव्यनो संचय कराय. (जेने वर्तमान परिभाषामां Sinking Fund कहेवाय छे.) २५-५० वर्षे आवनारा संभवित जीर्णोद्धार माटे, दर वर्षे थोडा थोडा देवद्रव्यनो संचय कराय, तो अपेक्षाए उचित मानी शकाय.
आवक अने सदुपयोग वच्चेना टूंका गाळा माटे इन्वेस्टमेन्ट करवुं पडे. (आवक पर्युषणमां थाय, खर्च आखा वर्ष दरमियान थाय.) ए जग्यामां तो थइ शके नहीं.
वर्तमान (इ.स.२०२६) कायदा मुजब, ट्रस्टनी (कोर्पस सिवायनी) कुल आवकमांथी, ८५ % आवक वर्ष दरमियान वापरी नाखवी फरजियात छे. वर्तमान (इ.स.२०२६) कायदा मुजब, ट्रस्ट सोनामां के जग्यामां इन्वेस्टमेन्ट करी शकतुं नथी.
दागीनो बनाववा माटे सोनुं लइ शकाय, पैसानुं रोकाण करीने वळतर मेळववा नहीं.ट्रस्टना कामकाज माटे जग्या लइ शकाय, पैसानुं रोकाण करवा माटे नहीं. सोनामां इन्वेस्टमेन्ट करवामां सोनुं साचववानी बहु मोटी मुश्केली छे. चोराइ शके, बदलाइने नकली सोनुं मूकाइ शके. वारे वारे तेनुं परीक्षण शक्य नथी.
जग्यामां इन्वेस्टमेन्ट करवामां घणी मुश्केली छे
जग्याना दस्तावेज वगेरेमां स्पेम्प ड्यूटी वगेरे मोटो खर्च आवे छे. (महाराष्ट्रमां ५ % छे.)
जग्या कायदाकीय रीते चोख्खी (Title Clear) होवी जरूरी छे.
जग्या खाली रहे, तो अनिच्छनीय तत्त्वो द्वारा दबाण थवा संभव छे.
जग्या लीधा पछी तेनी चेरिटी कमिशनरमां नोंधणी फरजियात छे.
जग्यामां जूनुं बांधकाम तोडवा के नवुं बांधकाम करवा माटे, म्युनिसिपालिटी उपरांत चेरिटी कमिशनरनी पूर्वमंजूरी आवश्यक छे.
जग्या वेचवा माटे चेरिटी कमिशनरनी पूर्वमंजूरी आवश्यक छे, जेनी प्रक्रिया खूब लांबी अने जटिल छे.
जग्याना वेचाणमां थयेल नफो - नवी जग्यामां इन्वेस्ट करवो अथवा ट्रस्टना कामकाज माटे वापरी नाखवो जरूरी छे; नहीं तो तेना पर इन्कम टेक्ष (शोर्ट टर्म के लोंग टर्म केपिटल गेइन्स टेक्ष) लागी शके छे.
आ बधुं विचारीने इन्वेस्टमेन्टनो निर्णय करवो.एटले वस्तुतः तो देवद्रव्यनो प्राचीन जिनमंदिरोना जीर्णोद्धार, आवश्यकता होय त्यां नूतन जिनमंदिरना निर्माण, जिनालयोना सुशोभन, सुरक्षा, परमात्मानी पूजा माटेनां उत्तम द्रव्यो, पर्वना दिवसोमां भव्य अंगरचना वगेरेमां सदुपयोग करवो उचित छे.
Article written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

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