मिथ्यात्व कोने कहेवाय ?
- Jul 30
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प्रश्न : मिथ्यात्व कोने कहेवाय ?
उत्तर :
मिथ्या’ शब्दनो अर्थ छे - ‘खोटुं’. खोटी मान्यताने मिथ्या मान्यता कहेवाय. आत्मामां रहेलो एवो दोष के जे मोटा भागनी अथवा महत्त्वनी मान्यताओने मिथ्या (खोटी) करे – तेनुं नाम मिथ्यात्व. जेनी बधी मान्यता खोटी होय, एवुं तो लगभग कोई न मळे. मूर्ख व्यक्ति पण, दिवसने दिवस ज माने, रातने रात ज माने.
जेनी बधी मान्यता साची होय, तेवा तो केवलज्ञानी ज मळे. केवलज्ञानी सिवाय दरेक व्यक्तिमां कोइक ने कोइक बाबतनो भ्रम होई शके छे, कोइक ने कोइक मान्यता मिथ्या होई शके छे. (केवळज्ञान-प्राप्तिनी पूर्वक्षणे पण असत्य वचनयोग होई शके छे – एम शास्त्र कहे छे.)
एटले प्रश्न थाय – कई मान्यताओ खोटी होय, तो मिथ्यात्व नामनो दोष मानवानो ? एनो जवाब छे ‘आत्माने हितकर शुं ? अहितकर शुं ?’ ए विषयनी मान्यता जेनी खोटी होय, तेनामां मिथ्यात्व दोष मानवानो. राग-द्वेष आत्माना शत्रु छे, कारणके बधा दुःखोनुं मूळ छे... एटले, जे राग-द्वेष घटाडे, ते आत्माने हितकर छे. राग-द्वेष वधारे, ते आत्माने अहितकर छे.
आवी मान्यता सम्यग् छे. आनाथी विपरीत मान्यता मिथ्या छे. तेवी मान्यता होय, तेनामां मिथ्यात्व नामनो दोष छे.
जे राग-द्वेष घटाडनार छे, ते हितकर होवाथी आचरवा जेवुं (उपादेय) छे.
जे राग-द्वेष वधारनार छे, ते अहितकर होवाथी छोडवा जेवुं (हेय) छे....
जेमणे राग-द्वेषनो संपूर्ण नाश कर्यो छे, ते ज सर्वोत्कृष्ट हितने पामी चूकेला परमात्मा छे. जे राग-द्वेषनो नाश करवा माटे प्रयत्नशील छे, अने बीजाने राग-द्वेषनो नाश करवानो उपदेश आपे छे, ते ज साचा गुरु छे. राग-द्वेषना नाशनो मार्ग – ए ज साचो धर्म छे. आवी बधी मान्यता सम्यग् छे. तेमां उपादेयमां उपादेय, हेयमां हेय, साचा देव-गुरु-धर्ममां ज देव-गुरु-धर्मनी रुचि (लागणी) होवाथी तेने तत्त्वरुचि कहेवाय छे. एनाथी विपरीत लागणी – तत्त्वमां अरुचि के अतत्त्वमां रुचि – ए मिथ्यात्व छे.
अहीं ए ध्यानमां राखवुं के ज्ञाननो क्षयोपशम न होवा वगेरे कारणे हितकरने अहितकर मानी ले... पण जो ज्ञानीनी वात स्वीकारवानी (पोतानी वात छोडवानी) तैयारी होय, तो कोईक मान्यता मिथ्या होवा छतां, मिथ्यात्व नामनो दोष नथी. कारण ए छे के मान्यता सम्यग् बनवानी योग्यता (ज्ञानी पर श्रद्धा) पडी छे.
Article written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

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