प्रतिज्ञा लईए तो अजाणता के भूली जवाथी भांगी जाय छे तो शुं करवुं ?
- Jul 17
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प्रश्न : प्रतिज्ञा लईए तो अजाणता के भूली जवाथी भांगी जाय छे तो शुं करवुं ?
उत्तर : प्रतिज्ञा न लो, एटले अविरतिनुं पाप तो ऊभुं ज रहे.
वळी नियम न होय, तो प्रलोभन आवे त्यारे लपसी जवानी शक्यता घणी वधारे छे. प्रतिज्ञा लेवाथी अविरतिनुं पाप तो टळे ज; दृढता पण आवे, सामान्य प्रलोभनमां फसावाय नहीं. एटले प्रतिज्ञा लेवामां लाभ ज छे.
जेने ‘प्रतिज्ञा पाळवी ज छे’ एवी ईच्छा छे, तेवो पुरुषार्थ छे, याद राखवा मांगे छे, काळजी करे छे.. तेने अजाणता भंग थाय के क्यारेक भूली जवाथी भंग थाय - ते पाप बहु नानुं छे. तेना करतां प्रतिज्ञानो लाभ बहु मोटो छे. एटले अजाणता - विस्मृतिना कारणे थता भंगना भयथी प्रतिज्ञा न लेवी - ते बराबर नथी. हा, कोईपण रीते भंग थइ जाय, तो प्रायश्चित्त अवश्य लेवुं.
प्रश्न : बाळक बाधा ले, तो तोडी नाखशे - तेवो भय होय छे. तो शुं करवुं ?
उत्तर : उपवास पहेली वार कराववो होय तो नवकारशी-एकासणानुं पच्चक्खाण आपीने करावाय. एक वार बराबर करे, तो बीजी वार उपवासनुं पच्चक्खाण अपाय.
ते रीते, जे बाधा लेवी छे, तेनी पूरी समजण-दृढता छे - तेवुं लागे तो ना न पाडवी. वगर समजणे लेतो होय तो अमुक जयणा राखीने, थोडा समयनी आपवी. जेम के शिबिर सांभळीने आईस्क्रीमनी बाधा मांगे.. तमने लागे के कोई प्रसंगे आईस्क्रीम जोशे तो खाई लेशे.. तो महिनामां २५-२७ दिवसनी बाधा अपाववी. सर्वथा ना न पाडवी.
Article written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

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