नेता कोने बनावाय ?....

नेतृत्व कोने सोंपाय ? बुद्धिमान्ने, गुणवान्ने के पुण्यशाळीने ?
सर्वथा निर्गुणीने न सोंपाय. पायाना गुणो होय तेवा पुण्यशाळीने सोंपाय; विशिष्ट बुद्धिमान् के विशिष्ट गुणवान् भले न पण होय. कारण ए छे के नेता पुण्यशाळी होय, तो समुदाय तेना नेतृत्व नीचे संपथी रहे, तेना वचनने स्वीकारे.
सभा : पण बुद्धि न होय, तो भूल न थाय ?
पुण्यशाळीने साची सलाह आपनारा बुद्धिमानो मळी रहे.
देखीती रीते तेनी भूल थाय तो पण, तेनुं पुण्य एवुं होय के परिस्थिति बदलाई जाय अने तेना निर्णयने साचो पाडे.
गुणो व्यक्तिगत आराधनामां काम लागे. सामुदायिक आराधना कराववा पुण्य जोईए.
प्रभवस्वामी चौद पूर्वधर हता. तेमना शिष्योमां पण ज्ञानी-पूर्वधरो, आराधक-तपस्वी-संयमी महात्माओ हशे ज. तेमां तेमने कोई पट्टधर बनवा योग्य न देखायुं, अने छेक शय्यंभव ब्राह्मण सुधी नजर पहोंचाडी. तेनुं कारण ए ज के तेवा पुण्यशाळी कोई नहीं होय.
शास्त्रोमां बाळमुनिने आचार्यपद आपवानी वात आवे छे, ते पुण्यना कारणे ज.
Extract from Book Aho Jinshasanam written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

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