भाव विनानी आराधनानुं फळ....
- Jul 4
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जे आराधनामां भावना न होवाथी तत्काळ कोइ दोषनाश न थतो होवा छतां, भविष्यमां भावना आववानी भूमिका तेमां होय, अने तेथी परंपराए दोषनाश थवानी संभावना जेमां होय;
ते आराधना पण दोषनाश करावनारी ज कहेवाय, सार्थक ज गणाय.
तेनाथी→
1.भावना आववानी भूमिका तैयार थाय छे.
2.बीजा आराधको अने आराधनानां स्थानो साथे संबंध ऊभो थाय छे, जे अनेक गुणोनुं प्रवेशद्वार छे.
3.आराधनाना-क्रियाना संस्कार पडे छे, जे भवांतरमां आराधनाने सरळ बनावे छे.
4.पुण्य बंधाय छे, जे शाता-समाधि-सद्गति आपे छे; धर्मनी सामग्री आपे छे.
Extract from Book Aaradhana Nu Fal written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.
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