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भाव विनानी आराधनानुं फळ....

  • Jul 4
  • 1 min read
શું થાળી ધોઈને પીવાથી આયંબિલ જેટલું પુણ્ય મળે? પૂજ્ય ભવ્યસુંદરસૂરીશ્વરજી મહારાજ સાહેબ સમજાવે છે 'થાળી ધોઈને પીવા' પાછળનું સાચું शास्त्रवचन અને હિંસાથી બચવાનો લાભ


जे आराधनामां भावना न होवाथी तत्काळ कोइ दोषनाश न थतो होवा छतां, भविष्यमां भावना आववानी भूमिका तेमां होय, अने तेथी परंपराए दोषनाश थवानी संभावना जेमां होय;


ते आराधना पण दोषनाश करावनारी ज कहेवाय, सार्थक ज गणाय.


तेनाथी

1.भावना आववानी भूमिका तैयार थाय छे.

2.बीजा आराधको अने आराधनानां स्थानो साथे संबंध ऊभो थाय छे, जे अनेक गुणोनुं प्रवेशद्वार छे.

3.आराधनाना-क्रियाना संस्कार पडे छे, जे भवांतरमां आराधनाने सरळ बनावे छे.

4.पुण्य बंधाय छे, जे शाता-समाधि-सद्‌गति आपे छे; धर्मनी सामग्री आपे छे.



Extract from Book Aaradhana Nu Fal written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.


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