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अनुकंपा कइ रीते कराय ?....

  • Jun 27
  • 1 min read
શું થાળી ધોઈને પીવાથી આયંબિલ જેટલું પુણ્ય મળે? પૂજ્ય ભવ્યસુંદરસૂરીશ્વરજી મહારાજ સાહેબ સમજાવે છે 'થાળી ધોઈને પીવા' પાછળનું સાચું शास्त्रवचन અને હિંસાથી બચવાનો લાભ


अनुकंपानां कार्यो (जेम के खीचडी घर वि.) ए रीते ज करवा जोईए जेथी वधुमां वधु शासन प्रभावना थाय.

‘आ जैनो करी रह्या छे’ एवी सौने खबर पडे, तेवा बेनर नीचे ज ए काम करवुं जोईए. ‘जैन’ शब्द आववो ज जोईए.


आवां कामोनी सर्वत्र जाहेरात पण करवी जोईए, जेथी सामान्य लोको पण जाणे के ‘जैनो मानवताना कार्यो पण करे ज छे, मात्र देरासरोमां पैसा नथी खरचता.’ आम करवाथी लोकोना हृदयमां जैनो प्रत्ये सद्भाव ऊभो थाय, जे शासन-प्रभावना छे.


सभा – आपणे सुकृतोनी जाहेरात न करवी जोईए, एवुं कहेवाय छे ने !

ए वात व्यक्तिगत स्तरनी छे. तमे तमारुं सुकृत जाहेर न करो, ते बराबर ज छे. पण अनुकंपा जेवा कार्यमां, 'जैन संघ' आ करी रह्यो छे, एवी जाहेरात अत्यंत जरूरी छे. कारणके

1. घणांने एवो भ्रम छे के जैनो पथ्थरमां ज पैसा खर्चे छे, ते दूर थाय.

2. जेमने सहायता मळे छे, तेमने जैनो, जैनोना भगवान प्रत्ये बहुमान ऊभुं थाय, जे बोधिबीज बने.

3. लोकोमां जैनोनी प्रशंसा थाय – ‘जैनो समाजनां सुंदर कार्यो करे छे.’


आ बधा लाभ घणा मोटा छे, एटले आवा सुकृतो जाहेर रीते ज करवा जोईए.



Extract from Book Samkit Nu Mul Janiyee Jee written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.


સમકિતનું મૂળ જાણીએ જી (Samkit Nu Mul Janiye Jee)
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