चंपा श्राविका...
- Jul 14
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‘आ शेनुं सरघस जई रह्युं छे ?’ महेलमां बेठेला बादशाहे सेवकोने पूछ्युं... लोकोनो कोलाहल अने ढोलनगाराना अवाजथी तेने जणायुं हतुं के घणा लोको जई रह्या छे.
सेवकोए समाचार आप्या – एक जैन स्त्री(श्राविका)ए महिनाना उपवास कर्या छे, तेनी पूर्णाहुतिनुं सरघस छे.
बादशाहने आश्चर्य थयुं - ‘महिनाना उपवास केवी रीते थइ शके ?’
स्त्रीने बोलावीने पूछ्युं - ‘आ शक्ति क्यांथी आवी ?’
श्राविकाए पोताना गुरु भगवंतनुं नाम आप्युं.
बादशाह गुरु भगवंतने मळ्या. तेमना आचारादिथी अत्यंत प्रभावित थया.
बादशाहनुं नाम अकबर. श्राविकानुं नाम चंपा, अने गुरु भगवंतनुं नाम जगद्गुरु हीरसूरिजी म.सा..
अकबरे हीरसू. म. सा. ने जगद्गुरुनुं बिरुद आप्युं... महिना अमारि प्रवर्तन संपूर्ण भारतमां कराव्युं... शिखरजीनो आखो पहाड संघने भेट आप्यो... आग्रानो ज्ञानभंडार भेट आप्यो... अकबर द्वारा जिनशासनने आटला बधा लाभ थया, तेनुं मूळ निमित्त, तपश्चर्याना पारणानी शोभायात्रा बनी.
जो अने तो – ए रीते विचारवुं होय, तो कही शकाय के चंपा श्राविकाए कोइ धामधूम वगर, कोइने खबर पाड्या वगर पारणुं कर्युं होत, तो जिनशासन आवा बधा लाभथी वंचित रह्युं होत.
जिनशासनमां थतो उचित आडंबर, देव-गुरुनी महत्ता वधारवा द्वारा प्रचंड शासन-प्रभावना करवानुं सामर्थ्य धरावे छे ! ए, आ घटना आपणने जणावे छे.
Article written by P.P. Bhavyasundar Vijayji Maharaj Saheb.

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